सोमवार, 14 जनवरी 2013

हरसिंगार झरे- डॉ. जगदीश व्योम


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत मधुर है शब्द चित्र यह
    नन्हे जीवन का विस्तार ..
    रचें सदा रचनाएँ सुन्दर
    महकाएं मन का संसार ...

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